Lekhani

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याद आता है वो मस्ती भरा बचपन ( ब्लॉग आमंत्रण – बचपन की यादें )

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ऐसा था मेरा बचपन जैसे मस्ती की मालगाड़ी
हर डिब्बे में थी एक नई मजेदार कहानी
किसी में बहती नदिया का कल-कल पानी
तो किसी में अमिया के बगिया की कहानी

ऐसा था मेरा बचपन जैसे मस्ती की मालगाड़ी
सुनी-सुनाई नहीं मेरी अपनी है यह कहानी
खिलखिलाता ऐसा बचपन था सुनो मेरी जुबानी
नानी के गांव में बीते गर्मी की छुट्टियों की है यह कहानी

ऐसा था मेरा बचपन जैसे मस्ती की मालगाड़ी
ज्येष्ठ की दुपहरिया में पेड़ों पर चढ़ लखनि खेलने की है यह कहानी
धूप से लाल आँखों पर नीम के पत्तियों की पट्टी बांधती याद आतीं हैं नानी
चुपके से कच्ची अमिया और खट्टी इमली खाने की है कहानी

ऐसा था मेरा बचपन जैसे मस्ती की मालगाड़ी
बँसवारीके पत्तों की चरमर में छिपने-छिपाने की है यह कहानी
यादों के झरोखों में दिख रही है आज भी कुछ निशाानी
ट्यूबवेल के पानी में छपछपाते बचपन की है यह कहानी

ऐसा था मेरा बचपन जैसे मस्ती की मालगाड़ी
खेत -खलिहानों में भूसे के ढेरों पर कूदने-फाँदनेकी है यह कहानी
नदियों में दुप्पट्टे का जाल बना मछली पकड़ने की थी तरक़ीब मस्तानी
गाय के नए जन्मे बछड़े को देखने के कौतूहल की है यह कहानी

ऐसा था मेरा बचपन जैसे मस्ती की मालगाड़ी
आज सारी बातें बनकर रह गई है बस एक कहानी
अब बच्चों को ऐसी मस्ती नहीं लुभाती
कंप्यूटर और मोबाईल की दुनिया में सिमट गई है सारी कहानी



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
May 26, 2014

वंदना जी,  बचपन के मासूम दिनों पर आपकी यह खूबसूरत कविता मन को छूती है । यादों के सहारे आपने बचपन के दिनों को बखूबी याद किया है । 

vandana singh के द्वारा
July 8, 2014

धन्यवाद एल.एस. बिष्ट् जी


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