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कसमकस भरी जिंदगी

Posted On: 26 May, 2014 Others,कविता में

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खफ़ा क्यों हो गई है मुझसे जिंदगी
असर न किया ऐे खुदा तेरी भी बंदगी
जो अपने थे वह हो गए हैं पराये
न जाने क्या खता हो गई है ऐे जिंदगी
हर एक शख्स पर एेतबार किया
शायद उसी का सिला दे रही है जिंदगी
रिश्ते दफ़न हो रहे है नफरतों की दीवार तले
गुम हो गई है कहीं वो हंसती मुस्कराती जिंदगी
टूट गई है हर आस फिर भी
कुछ पाने की कसक है बाकी
कैसी कसमकस भरी है ये जिंदगी



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
June 25, 2014

रिश्ते दफ़न हो रहे है नफरतों की दीवार तले गुम हो गई है कहीं वो हंसती मुस्कराती जिंदगी ! बहुत अच्छी रचना ! मन को स्पर्श करती हुई रचना ! बहुत बहुत बधाई !

vandana singh के द्वारा
June 27, 2014

धन्यवाद सद्गुरु जी


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