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सावन का महीना

Posted On: 16 Jul, 2014 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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बीता आषाढ़ आया सावन
हरियाली मन भावन लाया सावन

हर नारी के मन को लुभाता सावन
विरही प्रेमी की आस जगाता सावन

मेंहदी की खुशबू में नहाया सावन
झूले की हिलोरें खिलाता सावन

बीता आषाढ़ आया सावन
हरियाली मन भावन लाया सावन

कजली, तीज,पंचमी मनाता सावन
भाई-बहन का त्यौहार लेकर आया सावन

नवयौवना के सपनों का संसार है सावन
नई दुल्हन के उमंग का एहसास है सावन

बीता आषाढ़ आया सावन
हरियाली मन भावन लाया सावन

व्रत-उपवास में आस्था दिलाता सावन
शिव भक्ति में मन को रमाता सावन

खान-पान में परहेज सिखाता सावन
सादे भोजन की सार्थकता बतलाता सावन

बीता आषाढ़ आया सावन
हरियाली मन भावन लाया सावन
vandanasinghvas.blogspot.in



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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepak pande के द्वारा
July 17, 2014

वाह वंदना जी सावन पर आपकी kavita पद मैं में उल्लास आने लगा bahut khoob rachna

pkdubey के द्वारा
July 17, 2014

प्रकृति ,अध्यात्म,रिश्तों ,मानव जीवन सभी का कुछ सब्दों में अद्भुत वर्णन आदरणीया.

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
July 17, 2014

वदंना जी सावन के हर पहलू को आपने कविता मे बखूबी ढाला है । अच्छी कविता लिखी है आपने । पहले भी आपकी एक कविता बहुत पसंद आयी थी ” याद आता है वह मस्ती भरा बचपन “ मन को बहुत अच्छी लगी थी । जो रचना दिल  को छूए, वह हमेशा अच्छी ही होगी । कविता के मामले मे तो यह एक बडी कसौटी है ।

vandana singh के द्वारा
July 17, 2014

धन्यवाद एल.एस.बिष्ट जी

vandana singh के द्वारा
July 17, 2014

धन्यवाद pkdubey ji

vandana singh के द्वारा
July 17, 2014

शुक्रिया deepak pande ji

Sushma Gupta के द्वारा
July 17, 2014

जीवन व् प्रकृति के कई पहलुओं को दर्शाता सावन …इस सुन्दर रचना में , वधाई बंदना जी..

yogi sarswat के द्वारा
July 18, 2014

नवयौवना के सपनों का संसार है सावन नई दुल्हन के उमंग का एहसास है सावन बीता आषाढ़ आया सावन हरियाली मन भावन लाया सावन बढ़िया

vandana singh के द्वारा
July 18, 2014

धन्यवाद Sushma ji

vandana singh के द्वारा
July 18, 2014

धन्यवाद yogi ji

yamunapathak के द्वारा
July 18, 2014

वन्दना जी सावन की हरियाली और बारिश की फुहार का सुन्दर एहसास कराती कविता के लिए धन्यवाद साभार

vandana singh के द्वारा
July 18, 2014

धन्यवाद yamunapathak ji

Alka के द्वारा
July 22, 2014

वंदना जी ,आपकी रचना सावन की फुहारों सी भिगो गई | कई रंग सहेजे सुन्दर रचना ..

Shobha के द्वारा
July 22, 2014

महंदी की खुशबू से नहाया सावन सुन्दर भाव वन्दना जी पूरी कविता ही खूबसूरत है    शोभा

vandana singh के द्वारा
July 23, 2014

धन्यवाद Alka ji

vandana singh के द्वारा
July 25, 2014

आभार शोभा जी


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