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संघर्षशील नारी - विश्व महिला दिवस

Posted On: 8 Mar, 2015 social issues,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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नारी का जीवन नहीं आसान है


संघर्ष नारी का दूसरा नाम है;


सूरज रोज उदय होता है


अंधियारे संग रोज ढलता है;


पर नारी के संघर्ष  का


ना आदि होता ना अंत है;


सतयुग हो या कलियुग हो


संघर्षरत रही हर युग की नारी;


बुलंदियों को छू रही हैं आज नारियाँ


बनकर देश का गौरव;


अस्मत पर लेकिन उनकी


नजर डाले बैठे हैं आज भी कौरव;


जनक नंदिनी हो या पांचाली


दोनों के संघर्ष की है एक कहानी;


कभी देती अग्नि परीक्षा


कभी भरी सभा में होती अपमानित;


सदियाँ बीत गई पर


आज भी संघर्षरत है नारी;


हर तरफ उठती उन पर उंगलियाँ


नज़रों से भेदती अनगिनत पुतलियाँ;


मुश्किलें उनकी अनगिनत होतीं


फिर भी हौसले में ना कमी होती;


बछेंद्री पाल हो या मैरी कॉम


ना रही किसी की राह आसान;


लेकिन हर पर्वत को पार किया


अपनी मंजिल पर अधिकार किया ;


ये सब तो है जानी-पहचानी


पर कितनी है अब भी अन्जानी;


जिनका अनाम जीवन है


अनेक संघर्षों की कहानी;


सफ़र इनका चाहे मीलों दूर हो


पथ में बिखरे अनेक शूल हों;


पार कर वो हर बाधाओं को


दिखाती अपनी क्षमताओं को;


बढ़ती अपने साहिल की ओर


धाराओं को देती वे अनुकूल मोड़;


नारी ऐसी ही होती है


क्योंकि वे संघर्षशील होती हैं .


http://vandanasinghvas.blogspot.in/



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
March 8, 2015

bejod vandana ji!

vandana singh के द्वारा
March 9, 2015

धन्यवाद jlsingh ji

yamunapathak के द्वारा
March 12, 2015

वंदना जी सफ़र इनका चाहे मीलों दूर हो पथ में बिखरे अनेक शूल हों; पार कर वो हर बाधाओं को दिखाती अपनी क्षमताओं को; बढ़ती अपने साहिल की ओर धाराओं को देती वे अनुकूल मोड़; आपकी यह कविता सभी स्त्रियों की अभिव्यक्ति है साभार

vandana singh के द्वारा
March 13, 2015

सादर धन्यवाद यमुना पाठक जी .


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