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फाइव लेटर्स ऑफ़ ड्रीम

Posted On: 10 Sep, 2015 Junction Forum,Hindi News,Others में

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सपना अर्थात ‘DREAM’ तो हम सभी देखते हैं और हमारी ख्वाहिश होती है कि अपने हर सपने को सच करें ।ये सपने वह नहीं होते जो हम नींद में देखते हैं और आँख खुलने के बाद भूल जाते हैं बल्कि यह तो खुली आँखों से जागती अवस्था में देखे जाने वाले सपने होते हैं ,जिन्हें पूरा करने कि कोशिश में हमारी आँखों कि नींद ही गायब हो जाती है ।

डॉ. अब्दुल कलाम जी के अनुसार ,

“सपना वो नहीं है ,जो आप नींद में देखे,

सपना वो है ,जो आपको नींद ही नहीं आने दे ।”

अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से जीने की ख्वाहिश तो हर किसी की  होती है पर सिर्फ ख्वाहिश होना ही काफी नहीं होता बल्कि उसके लिए दृढ इच्छाशक्ति का होना भी आवश्यक है ।यह कतई  जरुरी नहीं कि आप हर क्षेत्र में नंबर वन हों तभी अपने लक्ष्य को पूरा कर सकते है, अंडर टेन रैंकर भी अपने सपने यानी ‘DREAM’ को पूरा कर सकते हैं ,बस जरुरत है  स्वयं के सपने  को शिद्दत से मापने की और इसके लिए हमें सबसे पहले ‘DREAM’ को जानना और समझना होगा ।

‘DREAM’:—

‘D’ फॉर डिसाइड (निर्णय)

‘R’ फॉर रिसर्च (शोध)

‘E’   फॉर इवेलुएट (मूल्यांकन)

‘A’ फॉर एक्ट (कार्य)

‘M’ फॉर मेंटेन (बनाए रखना)


अपने ‘DREAM’ को पूरा करना तभी संभव हो सकता है जबकि आप स्वयं के प्रति ईमानदार बने ,बिना किसी दबाव के अपने आप से पूछे कि वास्तव में आप चाहते क्या हैं,आपको यह निर्णय स्वयं लेना  होगा ।स्वयं कि सोच पर कायम रहने के लिए कोई टैक्स नहीं देना होता है और ना ही कोई और इसमें आपकी मदद कर सकता है क्योंकि कोई दूसरा व्यक्ति तो आपको सिर्फ सलाह देगा, निर्णय तो अपने पूरे मनोबल के साथ आपको ही लेना होगा और उस पर अडिग भी रहना पड़ेगा  तभी ‘DREAM’ का पहला स्टेप कम्पलीट होगा ।

अब जबकि आपने निर्णय ले ही लिया है कि वास्तव में आप चाहते क्या हैं तो अपने सपने को मूर्त रूप देने कि दिशा में दूसरा महत्वपूर्ण कदम आगे बढाना होगा जिसके लिए उन सभी बिन्दुओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा जो सपनों को पूरा कर सकते हैं ,हालांकि ऐसे हतोत्साहित लोगों कि भी कमी नहीं होगी जो आपको नकारात्मक परिणामों से अवगत करायेंगे पर आपको उत्साह खोने कि बजाय उन हारे हुए लोगों  द्वारा की गई गलतियों से सीख लेकर सकारात्मक दिशा में अपना कदम बढाना होगा ।यक़ीनन यह जोखिम भरा होगा पर आगे बढने के लिए हमें अपनी पूरी तैयारी के साथ जोखिम का सामना तो करना ही पड़ेगा ।

यदि आपने बिना किसी हिचकिचाहट के दृढ निश्चयी होकर आगे बढने की ठान ली है तो सबसे पहले यह आवश्यक है कि सभी विकल्पों का मूल्यांकन करके प्राथमिकताएं तय कि जाय । संभव है शुरू में बदलाव का सामना करना पड़े पर यह तो प्रकृति का नियम है , हर बदलाव अपने साथ कुछ नया ही लेकर आता है जो स्वतः ही पुराने की जगह ले लेता है और इसका स्वीकार्य ही हमें आगे ले जाएगा ।

सही विकल्प ही आपको अपनी मंजिल कि दिशा में सक्रिय कर सकता है ।यही वह समय है जब आप अपने सपने को पूरा करने के लिए बिलकुल तैयार रहते हैं पर हाँ ध्यान रहे मंजिल पर पहुँचने  के लिए एक बार में लम्बी छलांग न लगायें बल्कि संभल कर निरंतर प्रयास के साथ लक्ष्य कि ओर बढें । यह आसान नहीं होगा पर कठिनाइयों को निरंतरता पर हावी न होने दें ,अपनी पूरी ऊर्जा से लक्ष्य हासिल करने में जुट जाए ,नतीजा खुद-बखुद आपके सामने होगा,सफलता का आसमान हाथों से छूना मुश्किल नहीं होगा ,जल्द ही उँगलियों के पोरों को उसे पाने का सुखद एहसास  होगा ।

चुनौतीभरे लक्ष्य को पाने से ज्यादा दुष्कर उसको कायम रखना है । किसी भी सफलता का लचीला रुख ही उसकी निरंतरता को बनाए रख सकता है । समयानुसार परिवर्तन और सामंजस्य ही वास्तव में सफलता कि कुंजी होता है और यही कुंजी हमारे सपनों को हकीकत में तबदील करती है ।


“So let’s dream and turn them into reality”





http://vandanasinghvas.blogspot.in/2015/09/blog-post.html

Web Title : dream



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