Lekhani

this blog is based on customs,traditions,modern view and goverment rule of india and human emotions

62 Posts

88 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15299 postid : 1114591

माटी का दीया

Posted On: 12 Nov, 2015 कविता,Special Days,Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

कुम्हार  के पैरों तले रौंदा गया ,फिर हाथों ने तरतीब से गढ़ा
चाक पर कई मोड़ से गुजरकर ,नाम उसको मिला इक दीया
बंद गली की किसी ,सीलनभरी  चौखट पर
उम्मीदों  का टिमटिमाता दीया
आलिशान महलों में ,तुलसी के चौबारे पर
खुशियों का चमकता दीया
नयी दुल्हन के हाथों से जला
शगुन का दीया
मंदिर के प्रांगण में अध्यात्म का
प्रज्जवलित दीया
तल में अँधेरा लिए
रोशनी की जगमग फैलाता दीया
माटी में मिल जाता
जलने के बाद ,फिर माटी का दीया
कुम्हार  के पैरों तले रौंदा गया ,फिर हाथों ने तरतीब से गढ़ा
चाक पर कई मोड़ से गुजरकर ,नाम उसको मिला इक दीया
बंद गली की किसी ,सीलनभरी  चौखट पर
उम्मीदों  का टिमटिमाता दीया
आलिशान महलों में ,तुलसी के चौबारे पर
खुशियों का चमकता दीया
नयी दुल्हन के हाथों से जला
शगुन का दीया
मंदिर के प्रांगण में अध्यात्म का
प्रज्जवलित दीया
तल में अँधेरा लिए
रोशनी की जगमग फैलाता दीया
माटी में मिल जाता
जलने के बाद ,फिर माटी का दीया
http://vandanasinghvas.blogspot.in/


Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran